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25 सितंबर 2026 को LINK नाम का रोबोटिक टो ट्रक पृथ्वी के ऊपर जलकर खत्म हो गया। उसे Swift अंतरिक्ष टेलीस्कोप को बचाने के लिए भेजा गया था, जिसने 22 साल ब्रह्मांड के सबसे ताकतवर धमाकों को पकड़ने में बिताए और जो अब धीरे-धीरे नीचे गिर रहा है। बचाने वाला पहले ही चला गया। NASA ने 23 अक्टूबर को Swift बंद कर दिया , और टेलीस्कोप कुछ ही हफ्तों में वायुमंडल से टकराएगा।
यह कक्षा में ऐसे उपग्रह को पकड़ने की पहली कोशिश थी, जिसे ऐसी मुलाकात के लिए किसी ने कभी तैयार ही नहीं किया था। Swift में न हैंडल हैं, न डॉकिंग पोर्ट। बचाव अभियान चलाने वाली कंपनी के प्रमुख Ghonhee Lee ने कहा कि उसमें “कोई इंटरफ़ेस, ग्रैपल फिक्सचर या USB पोर्ट नहीं है, जिसमें कुछ लगाया जा सके।” Lee ने याद किया कि उनके इंजीनियरों के पास एक बेहद बुनियादी चीज़ नहीं थी: 2004 में प्रक्षेपण से पहले किसी ने टेलीस्कोप के पिछले हिस्से की तस्वीर नहीं ली थी।
एक शिकारी, जिसके पास बस एक मिनट था
Swift गामा-किरण विस्फोटों का पीछा करता था। ये चमकें तब पैदा होती हैं, जब विशाल तारे मरते हैं या उनके अवशेष आपस में टकराते हैं। विस्फोट सेकंड के एक छोटे अंश से लेकर कुछ मिनटों तक चलता है, और उसके बाद जो धुंधली रोशनी बचती है, उसे आफ्टरग्लो कहते हैं। Swift विस्फोट देखता, करीब एक मिनट में उसकी ओर घूम जाता और निर्देशांक दूसरी वेधशालाओं को भेज देता। एक बार उसने सिर्फ 0.03 सेकंड की चमक पकड़ी थी, जो पलक झपकने से भी छोटी है। उसे दो साल के लिए बनाया गया था, उसने लगभग 22 साल काम किया और 2,000 से ज़्यादा विस्फोट पकड़े।
सूरज ने आसमान फुला दिया
Swift नीची कक्षा में उड़ता है, और खुद को ऊपर उठाने के लिए उसके पास कोई इंजन नहीं है। उस ऊंचाई पर हवा लगभग खाली होती है, पर पूरी तरह नहीं, और हर चक्कर उसे थोड़ा नीचे खींच लेता है। पिछले कुछ सालों में सूरज खास तौर पर सक्रिय रहा है। वह वायुमंडल को गर्म करता है , वायुमंडल ऊपर की ओर फैलता है, और निचली कक्षाओं के उपग्रहों को ज़्यादा खिंचाव झेलना पड़ता है।
Swift करीब 600 किमी की ऊंचाई से शुरू हुआ था। फरवरी 2026 तक वह 400 से नीचे आ चुका था, और बचाव सिर्फ 300 से ऊपर ही संभव था। यानी कुछ ही महीने बचे थे, और टीम को विज्ञान और समय में से एक चुनना था। 11 फरवरी को उन्होंने एक्स-रे और पराबैंगनी टेलीस्कोप बंद कर दिए और Swift को सबसे सुव्यवस्थित मुद्रा में खड़ा कर दिया। अप्रैल में बिजली बचाने और सोलर पैनल को इस तरह घुमाने के लिए कि उन पर कम हवा लगे, विस्फोट डिटेक्टर भी बंद कर दिया गया।
टेलीस्कोप ने आसमान को देखना बंद कर दिया, ताकि वह उसमें और देर तक टिका रह सके।

नौ महीनों में बना टो ट्रक
सितंबर 2025 में NASA ने फ्लैगस्टाफ, एरिज़ोना की कंपनी Katalyst Space को 3 करोड़ डॉलर दिए । Swift की अपनी लागत 36.4 करोड़ डॉलर थी, यानी बचाव का खर्च टेलीस्कोप की कीमत के दसवें हिस्से से भी कम रहा। Katalyst को एक अंतरिक्ष यान बनाना था, Swift तक पहुंचना था, उसे पकड़ना था और ऊपर धकेलना था।
LINK 1.8 मीटर ऊंचा और करीब 400 किलो का बना। उसकी तीन रोबोटिक भुजाओं में लिडार (लेज़र रेंजफाइंडर, जो किसी वस्तु की 3D तस्वीर बनाते हैं) थे, साथ में तीन ज़ेनॉन आयन थ्रस्टर और 6-6 मीटर के दो सोलर पैनल। योजना यह थी: कई हफ्ते Swift के चक्कर लगाकर उसकी बाहरी सतह पर पकड़ने लायक जगहें ढूंढना, फिर महीनों तक धीरे-धीरे उसे ऊपर धकेलना। यह खोज लाइव ही करनी पड़ती, क्योंकि इंजीनियरों के पास न तस्वीरें थीं, न टेलीस्कोप के पिछले हिस्से का कोई ब्योरा। बचाव यान के पास पकड़ने की हर ज़रूरी चीज़ थी, और LINK परियोजना के प्रमुख Kieran Wilson ने रफ्तार के बारे में खुलकर माना: छह महीने पहले पूरा यान बस एक PowerPoint स्लाइड डेक था।
3 जुलाई 2026 को LINK को लेकर चला Pegasus XL रॉकेट प्रशांत महासागर में क्वाजालीन एटोल के ऊपर करीब 12 किमी की ऊंचाई पर वाहक विमान के नीचे से छोड़ा गया। रॉकेट ने अपना काम कर दिया।
तीन हफ्ते में टेलस्पिन
28 जुलाई को Katalyst ने बताया कि LINK तीन दिन से कई अक्षों पर लुढ़क रहा है। उसके तीन में से दो रिएक्शन व्हील खराब हो चुके थे। ये यान के अंदर घूमने वाले पहिये हैं: उनकी गति बदलकर उपग्रह बिना ईंधन जलाए मुड़ सकता है। यान से संपर्क बार-बार टूट रहा था। फिर भी कंपनी ने हिम्मत नहीं छोड़ी: उसके मुताबिक LINK के पास “Swift से मिलन का व्यावहारिक रास्ता” था, और Wilson ने टेलीस्कोप को “अप्रस्तुत, मगर सहयोगी साझेदार” कहा।
घुमाव की वजह, जैसा पता चला , एक खराब वाल्व थी। इंजीनियरों ने LINK को दोबारा काबू में कर लिया, पर उसके पास अब Swift को पकड़ने और ऊपर उठाने लायक ईंधन नहीं बचा था। यहीं सब खत्म हो गया। 19 अगस्त को NASA और Katalyst ने बचाव अभियान रद्द कर दिया । NASA के प्रशासक Jared Isaacman ने कहा, “हम इस नतीजे के लिए काम नहीं कर रहे थे, लेकिन इससे यह नहीं बदलता कि इस मिशन को आज़माना क्यों सार्थक था।”
दोनों आखिरकार मिले ज़रूर, भले दूर से। नियंत्रकों ने LINK को Swift से 12 से 15 किमी के भीतर पहुंचा दिया, इतना पास कि तस्वीरें ली जा सकें। वहां से फोटो खींचे जा सकते हैं, कुछ पकड़ा नहीं जा सकता: बचाने वाला उस पिछले हिस्से तक कभी नहीं पहुंचा, जिसकी 2004 में किसी ने तस्वीर नहीं ली थी। 25 सितंबर को LINK वायुमंडल में लौटा और जल गया, उस यान से एक महीने से ज़्यादा पहले, जिसे बचाने आया था।
// घटनाक्रम
- NASA ने Katalyst को चुना और बचाव में 3 करोड़ डॉलर लगाए
- ड्रैग घटाने के लिए Swift ने ज़्यादातर अवलोकन रोक दिए
- LINK प्रशांत महासागर के ऊपर विमान से रवाना हुआ
- Katalyst ने बताया कि LINK तीन दिन से लुढ़क रहा है
- बचाव अभियान रद्द हुआ
- LINK वायुमंडल में जल गया
- Swift ने आखिरी अवलोकन किया
- NASA ने मिशन खत्म होने की घोषणा की
गिरने के बाद जो बचा
Swift ने आखिरी अवलोकन 20 अक्टूबर को किया। तब तक वह 275 किमी से नीचे आ चुका था, यानी शुरुआती ऊंचाई के आधे से भी कम, जहां हवा का खिंचाव इतना ज़्यादा है कि टेलीस्कोप किसी लक्ष्य पर स्थिर नहीं रह सकता। इंजन के बिना उसके गिरने की दिशा कोई तय नहीं कर सकता। यान का ज़्यादातर हिस्सा जल जाने की उम्मीद है, और NASA का कहना है कि धरती पर किसी को नुकसान पहुंचने की आशंका कम है।
Swift जो पीछे छोड़ रहा है, वह एक संग्रह है: लगभग 22 साल की माप, 15 लाख से ज़्यादा पराबैंगनी और ऑप्टिकल तस्वीरें, करीब 12 टेराबाइट डेटा, सब कुछ सार्वजनिक। खगोलविद इसे खंगालने में लंबे समय तक लगे रहेंगे।
Swift ने वादे से ग्यारह गुना ज़्यादा समय काम किया, और उसे नीचे हवा खींच रही है। LINK तो यह सवाल तक नहीं पहुंच पाया कि उसे कहां से पकड़ा जाए, क्योंकि उससे पहले उसका अपना वाल्व खराब हो गया, और Katalyst का कहना है कि वह सबक आगे के मिलन अभियानों में साथ ले जाएगी। AP को उम्मीद है कि Swift नवंबर की शुरुआत में वायुमंडल में लौटेगा। बचाने वाला और बचाया जाने वाला, एक महीने से कुछ ज़्यादा के अंतर से, एक ही तरह खत्म होंगे: रात के आसमान में एक पल की लकीर बनकर।







